बिकिनी एयरलाइन्स – जो जल्दी ही भारत में शुरू करने जा रही है अपनी हवाई सेवा

बिकिनी एयरलाइन्स – जो जल्दी ही भारत में शुरू करने जा रही है अपनी हवाई सेवा

हर एयरलाइंस की एयरहोस्‍टेस और उनकी यूनिफॉर्म न सिर्फ एयरलाइंस की पहचान होती है बल्कि एयर ट्रेवल करने वालों के बीच आकर्षण का केंद्र होता हैं। यहां तक की कुछ एयरलाइंस की एयरहोस्‍टेज की यूनिफॉर्म तो उन देश की संस्‍कृति की परिचायक होती हैं।

बिकनी एयरलाइन्स



लेकिन आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि कुछ एयरलाइंस मार्केटिंग स्‍टेट्रर्जी के तहत एयर हॉस्‍टेज की ऐसी ड्रेस डिजाइन करवाते है, ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा कस्‍टमर्स को विमान यात्रा के लिए अट्रेक्‍ट किया जा सकें।

बिकनी एयरलाइन्स



ऐसी ही एक एयरलाइसं है ‘बिकिनी एयरलाइंस’ जो इन दिनों जल्‍द ही इंडिया में अपनी सर्विस शुरु करने की वज‍ह से लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। हाल ही में इस कंपनी ने यह घोषणा की हैं कि वो जुलाई-अगस्‍त में अपनी सेवाएं शुरु कर सकता हैं। पोस्ट में अंत में इस एयरलाइन का विडियो देखना नही भूले.

बिकनी एयरलाइन्स



एयरलाइन का ड्रेस कोड

एयरलाइन की एयरहोस्टेस का ड्रेस कोड बिकिनी कम्‍पनी की सीईओ ‘Nguyen Thi Phuong Thao’ ने चुना है। बता दें कि वे वियतनाम की पहली बिलियन एयर महिला हैं। हाल ही में ये एयरलाइन फुटबॉल टीम के वेलकम में एयरहोस्टेस को लांजरी पहनाने के लिए चर्चा रही थी।

बिकनी एयरलाइन्स

विवादास्‍पद एयरलाइन

एयरलाइन दुनिया की सबसे विवादास्पद एयरलाइनों में से एक है, क्योंकि, कुछ देश बिकनी होस्टेस की इस कॉन्‍सेप्‍ट के खिलाफ हैं और हो सकता है कि भारत में भी आगे चलकर इस एयरलाइंस का विरोध हो।

बिकनी एयरलाइन्स



बिकिनी एयरहॉस्‍टेज का कैलेंडर फोटोशूट

ये एयरलाइन हर साल अपनी बिकिनी एयरहॉस्‍टेज का कैलेंडर शूट भी करवाता हैं। दुनियाभर की आला टॉप मॉडल्‍स और एयरलाइंस की एयरहॉस्‍टेज का ऑडिशन लेकर इस एनुअल कैलेंडर में उन्‍हें जगह दी जाती हैं। जैसे किंगफिशर का कैलेंडर शूट, जिसके लिए देशभर से मॉडल्‍स ऑडिशन देकर इस कैलेंडर में अपनी जगह बनाती हैं।

बिकनी एयरलाइन्स

बिकिनी परेड से सलेक्‍शन इस एयरलाइंस की एयरहॉस्‍टेज का सलेक्‍शन उसकी क्‍वालीफिकेशन, ग्रूमिंग और पर्सनेलिटी के अलावा बिकिनी परेड के आधार पर की जाती हैं।



फ्लाइट में करा चुका है फैशन शो ये लॉ बजट एयरलाइन ने एक बार उड़ान के दौरान फैशन शो का आयोजन किया था। जिसमें स्विमिंग सूट पहने हुए मॉडल ने पार्टीसिपेट किया था। जिसके वजह से ये एयरलाइन खूब हाईलाइट में आया था। लेकिन उड़ान के दौरान हवाई नियमों को ताक में रखकर इस फैशन शो को आयोजित करने की वजह से इस एयरलाइन पर जुर्माना भी लगाया गया था।

बिकनी एयरलाइन्स

लॉ कॉस्‍ट कैरियर इस एयर लांइस को 2016 में शीर्ष 500 ब्रांडों में से सर्वश्रेष्‍ट एशिया का बेस्‍ट लो कॉस्‍ट कैरियर का खिताब भी मिल चुका हैं।

देखिये बिकनी एयरलाइन्स के अंदर का विडियो

तो सखियों ये थी भारत में शीघ्र ही शुरू होने वाली बिकनी एयरलाइन्स के विषय में कुछ जानकारी, अगर आपको हमारा ये आर्टिकल अच्छा लगा हो तो आप इसे फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर अपने मित्रों के साथ आगे भी शेयर करके साझा कर सकते है, शेयरिंग आप्शन नीचे दिए गये है.

प्रेरणादायक सच्ची कहानियां

प्रेरणादायक सच्ची कहानियां – वो पांच महिलाएं जिन्होंने जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियों को हरा दिया

पांच महिलाओं की प्रेरणादायक सच्ची कहानियां, भी प्रेरणा से भर देंगी जो आपको

सखियों मोना गुरु का हमेशा से प्रयास रहा है की अपने पाठको के लिए ऐसी जानकारी लाई जाए जो अपने आप में एक मिसाल तो हो ही साथ ही वो कई लोगो को प्रेरित भी कर सके और उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव भी ला सके, इसी कड़ी में आज मोना गुरु आपके लिए पांच ऐसी महिलाओं की प्रेरणादायक सच्ची कहानियां लेकर आई है जिन्होंने जीवन की मुश्किल से मुश्किल चुनोतियों का सामना करते हुए भी विजय पाई और आज वो समाज के लिए किसी नायिका से कम नही है.



1. जेसिका कॉक्स (Jessica Cocks)

जेसिका कॉक्स - Jessica Cox

हाथों से नहीं, पैरों से हवा में उड़ान भरती हैं जेसिका- अमेरिका के एरिज़ोना में जन्मी और वहीं रहने वाली जेसिका कोक्स (32) जन्म से अपंग हैं। उनके दोनों हाथ नहीं थे, इसके बावजूद वह पायलट है। बिना हाथों वाली वह दुनिया की पहली पायलट है, जो हाथों से नहीं, पैरों से प्लेन उड़ाती हैं।लेकिन यह कमजोरी ही उनकी ताकत बनी। आज जेसिका वो सभी काम कर सकती हैं और करती हैं, जो आम लोग भी नहीं कर पाते। उनके पास ‘नो रिस्टिक्शन’ ड्राइविंग लाइसेंस है। जिस विमान को जेसिका उड़ाती है उसका नाम ‘एरकूप’ है। जेसिका के पास 89 घंटे विमान उड़ाने का एक्सपीरियंस है।

जेसिका डांसर भी रह चुकी हैं और ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट भी हैं। वे 25 शब्द प्रति मिनट से टाइपिंग भी कर सकती हैं। जेसिका पर एक डॉक्युमेंट्री भी बन चुकी हैं ‘राइट फुटेड’ जिसे डायरेक्ट किया है एमी अवॉर्ड विनर ‘निक स्पार्क’ ने।

कुछ और तस्वीरे देखिये जेसिका कॉक्स की

जेसिका कोक्स - Jessica Cox

जेसिका अपने विमान में



2. स्मीनू जिंदल (Sminu Jindal)

स्मिनु जिंदल - sminu jindal

11 साल में खोए थे पैर, आज अपनी कंपनी की MD हैं स्मीनू जिंदल- जिंदल फैमिली की स्मीनू उन दिव्यांगों के लिए आदर्श हैं जो जिंदगी अपनी तरह से जीना चाहते हैं। स्मीनू ने अपनी विकलांगता को अवसर माना और अपनी ऐसी पहचान बनाई कि आज उनकी व्हीलचेयर खुद को लाचार समझती है।आज स्मीनू जिंदल ग्रुप की कंपनी जिंदल सॉ लिमिटेड की एमडी हैं। उनका ‘स्वयं’ एनजीओ भी है। स्मीनू जब 11 साल की थीं, तब जयपुर के महारानी गायत्री देवी स्कूल में पढ़ती थीं। छुट्टियों में दिल्ली वापस आ रही थीं, तभी कार एक्सीडेंट हुआ और वह गंभीर स्पाइनल इंजरी की शिकार हो गई। हादसे के बाद उनके पैरों ने काम करना बंद कर दिया और व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा।

स्मीनू बताती हैं, अपने रिहैबिलिटेशन के बाद जब मैं इंडिया वापस आई तो काफी कुछ बदल चुका था। मैंने मायूस होकर पिताजी से कहा था कि मैं स्कूल नहीं जाऊंगी, पर पिताजी ने जोर देकर मुझसे कहा कि तुम्हें अपने बहनों की तरह ही स्कूल जाना पड़ेगा। आज मेरे पति और बच्चों के लिए भी मेरी विकलांगता कोई मायने नहीं रखती।

स्मीनू कहती है- ‘आपको आपका काम स्पेशल बनाता है न कि आपकी स्पेशल कंडीशन। मेरे जैसे जो भी लोग हैं, उन्हें यही कहूंगी- खुद की अलग पहचान बनाने के लिए अपनी कमी को आड़े न आने दें, यही कमी आगे चलकर आपकी बड़ी खासियत बन जाएगी।”

स्मीनू का एनजीओ ‘स्वयं’ आज NDMC, ASI, DTC और दिल्ली शिक्षा विभाग के साथ मिलकर कई काम कर रहा है।

कुछ और तस्वीरे स्मीनू की

स्मीनू जिंदल



3. ली जुहोंग (Li Zhong)

बचपन में पैर खोए, फिर भी डॉक्टर बनीं, अब इलाज करने रोज करती है पहाड़ पार- चीन के चांगक्वींग की रहने वाली ली जुहोंग जब 4 साल की थीं तो एक रोड एक्सीडेंट दोनों पैर गंवाने पड़े। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर बन कर आज पहाड़ी गांव में क्लीनिक खोलकर लोगों की सेवा कर रही है।-1983 में एक ट्रक ने ली को टक्कर मार दी। दोनों पैर बुरी तरह जख्मी हो गए थे।

– डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर जूहोंग के दोनों पैर घुटने के ऊपर से काट दिए।

– ठीक होने के बाद होंगजू ने लकड़ी के स्टूल के सहारे चलना सीखा। शुरुआत में उन्हें लगा कि वह चल नहीं पाएंगी।

– आठ साल की उम्र में चलना सीख लिया। इसके बाद फिर से स्कूल जाना शुरू किया।

– 2000 में स्पेशल वोकेशनल स्कूल में मेडिकल स्टडी के लिए एडमिशन लिया और डिग्री हासिल की।

– इसके बाद गांव वालडियन में क्लीनिक खोलकर ग्रामीणों का इलाज शुरू किया।

– जुहोंग इमरजेंसी कॉल आने पर मरीज को घर पर भी देखने जाती हैं। उन्हें अक्सर ऊंचे-नीचे रास्तों से जाना होता है।

क्लीनिक खोलने के कुछ दिनों बाद ही होंगजू की शिंजियान से मुलाकात हुई। दोनों में प्यार हुआ और फिर शादी कर ली। शिंजियान ने नौकरी छोड़कर घर की पूरी जिम्मेदारी संभाली। शिंजियान पीठ पर बैठाकर जुहोंग को क्लीनिक तक छोड़ने जाते हैं। ली अब तक 1000 से अधिक लोगों का इलाज कर चुकी हैं।



4. मुस्कान अहिरवार (Muskan Ahirwar)

muskaan ahirwar - मुस्कान अहिरवार

9 साल की बच्ची गरीब बच्चों के लिए चलाती है लाइब्रेरी- भोपाल में एक 9 साल की बच्ची मुस्कान अहिरवार गरीब बच्चों के लिए ‘बाल पुस्तकालय’ नाम से एक लाइब्रेरी चलाती है। तीसरी क्लास में पढ़ने वाली मुस्कान के पास फिलहाल 119 किताबें हैं। मुस्कान रोज़ाना इस लाइब्रेरी में बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करती है।भोपाल के अरेरा हिल्स के पास बने स्लम एरिया में रहने वाली मुस्कान की मां हाउस वाइफ हैं और पिता बढ़ई। मुस्कान की बड़ी बहन 7वीं में पढ़ती है। लाइब्रेरी के लिए मुस्कान हर दिन 4 बजे शाम में स्कूल से घर आती है फिर उसके बाद अपने घर के बाहर किताबें सजाती हैं और कहानियां सुनाकर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

सरकार से मिली मदद

पिछले साल राज्य शिक्षा केंद्र ने उसे 25 किताबें दी थी। इन किताबों की संख्या अब बढ़कर 119 हो गई है। राज्य शिक्षा केंद्र ने अब उसे यह लाइब्रेरी संभालने की जिम्मेदारी दी है। अब मुस्कान और स्लम के बच्चे शिक्षा केंद्र से और किताबों की मांग करने जा रहे हैं, क्योंकि अब तक की सभी किताबें बच्चे पढ़ चुके हैं। शायद मुस्कान भारत की सबसे कम उम्र की लाइब्रेरियन है।

कुछ और तस्वीरे मुस्कान की

muskaan ahirwar - मुस्कान अहिरवार
muskaan ahirwar - मुस्कान अहिरवार



5. रेखा (Rekha)

खेतों में हल चलाकर इस महिला ने बना दिया रिकॉर्ड- पति की असमय मौत के बाद मुरैना जिले में पहाड़गढ़ के पास गांव जलालपुरा की एक महिला ने खेत में खुद हल चलाकर नेशनल रिकॉर्ड बना दिया। उसे समाज के लोग विधवा कहकर घर पर बैठने की हिदायत दे रहे थे लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। आज रेखा अपने खेत में आधुनिक तौर-तरीके से खेती करती हैं और पैदावार भी काफी बढ़ा ली।- महज 1 हेक्टेयर के खेत में 50 क्विंटल बाजरा पैदा कर नया रिकॉर्ड बनाया, क्योंकि अब तक नेशनल एवरेज 15 क्विंटल था।

– रेखा की इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय कृषि-कर्मण अवॉर्ड के लिए सम्मानित किया है।

– पति की जब मौत हुई तो समाज ने रेखा को विधवा कह कर घर बैठने की हिदायत दी थी। कंधों पर दो बेटियों और एक बेटे की जिम्मेदारी थी और गुजारे के नाम पर महज 1 हेक्टेयर का खेत। इसी के सहारे परिवार पालना था।

– खुद अपनी खेती को संभालने बाहर निकली तो रेखा को समाज से भी जंग लड़नी पड़ी।

– समाज के असहयोग के चलते कई बार तो गृहस्थी के काम के साथ खुद रेखा को खेतों में हल भी चलाना पड़ा। आखिरकार रेखा की जिद कामयाब हो गई है, अब गांव के लोग भी रेखा पर गर्व कर रहे हैं।



तो मित्रों ये थी उन पांच महिलाओं की सच्ची कहानी जिन्होंने जीवन की कठिनतम चुनौती का सामना करते हुए भी उस पर विजय पाई और अपने देश और समाज की सच्ची नाइका के रूप में स्थापित हुई, मित्रों आपको अगर मोना गुरु का ये आर्टिकल अच्छा लगा हो तो आप इसे फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर अपने मित्रों के साथ शेयर भी कर सकते है.

“मोना-गुरु” हर महिला की वो आभासी (वर्चुअल) सहेली है ,जो रोजमर्रा की हर मुश्किल का आसान हल तो देती ही है साथ ही अपनी सखियों को घर-संसार से जुड़ी हर बातों में आगे भी बनाये रखती है.


महिला क़ानूनी अधिकार

महिला क़ानूनी अधिकार – जिसकी जानकारी होना हर महिला के लिए बेहद आवश्यक है

मित्रों जैसा की मोना गुरु का प्रयास रहता है की अपनी सखियों और मित्रों को हर जरूरी जानकारी से आसान भाषा में परिचित करवा कर उन्हें आगे बनाये रखना है, तो इसी कड़ी में आज मोना गुरु आपको महिलाओं से जुड़े उन विशेष कानूनों की जानकारी दे रही है जो किसी परिस्थिति विशेष में एक महिला के लिए बेहद ही काम के साबित हो सकते है.



1. शनिवार और रविवार को बेल ( जमानत ):

कई बार देखा गया है की वकील और पुलिस महिला पर अनावश्यक दवाब बनाते है की शनिवार और इतवार होने के कारण कुछ नही हो सकता, ऐसे में महिलाओं को उनका ये अधिकार मालूम होना ही चाहिए.

2. सेक्शन 154 :

भारतीय कानून की इस धारा के तहत भी महिलाओं को बेहद विशेष अधिकार दिए गये है, लेकिन जानकारी के अभाव में महिलायें इसका उपयोग नही कर पाती है और उनको कोर्ट में विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ जाता है.

3.जीरो ऍफ़आईआर :

एक लम्बे समय से देश के नागरिक ये शिकायत करते आ रहे है की वो पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत लेकर गये लेकिन पुलिस ने यह कहकर पल्ला झाड लिया की ये उनके इलाके का मामला नही है, इस तरह के मामले बढ़ते देख कर भारत सरकार द्वारा जीरो ऍफ़आईआर को लागू किया और अब यह अधिकार सिर्फ महिलाओं को ही नहीं अपितु देश के हर नागरिक को दिया गया है.



4. सेक्शन 354 :

आजकल देखा गया है की लोगो ने महिलाओं का अपमान करना जैसे एक शगल ही बना लिया है, भारत सरकार द्वारा इस दिशा में भी पहल करते हुए महिलाओं को विशेष शक्तियां दी गयी है

5. सेक्शन 503 :

समाज में कई बार देखा गया है की कुछ लोग महिलाओं को धमका कर या उन पर अन्य प्रकार से नाजायज दवाब बनाकर अपना उल्लू सीधा करना चाहते है, ऐसे में ये धारा महिलाओं को उनकी सुरक्षा के लिए पूर्ण शक्ति प्रदान करती है और इस प्रकार के लोगो की नाक में नकेल भी डाल देती है.

सखियों और सभी मित्रों यदि आपको ये जानकारी अच्छी लगी हो तो आप इसे फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर शेयर करके आगे भी अपने मित्रों के साथ साझा कर सकते है, शेयरिंग के लिए आवश्यक लिंक्स नीचे दिये गये है.

विशेष महिला बैंक स्कीम्स

विशेष महिला बैंक-स्कीम्स जिसमें बिना किसी गारंटी और गिरवी के महिलाओं को लोन मिलेगा

विशेष महिला बैंक-स्कीम्स जिनकी जानकारी हर महिला को होनी चाहिए

जब भी हम लोन लेने जाते है एक सबसे बड़ी समस्या सामने आ जाती है की लोन की गारंटी कौन देगा और हमे लोन के बदले क्या क्या गिरवी रखना पड़ेगा, तो आज मोना-गुरु आपको बताने जा रही है ऐसी बैंक स्कीम्स के बारे में जो विशेष रूप से महिलाओं की उद्यम शीलता को बढाने के लिए चलाई जा रही है और इनमे किसी भी प्रकार की कोई गारंटी और गिरवी की जरूरत नहीं है, इन लोन्स के द्वारा आप अपना बिजनेस शुरू कर सकती हैं। यदि पहले से कोई बिजनेस कर रही हैं तो उसे भी मॉर्डनाइज कर सकती हैं। आज हम ऐसी ही 7 स्कीम्स की जानकारी दे रहे हैं, जो आपके काम आ सकती हैं।



    मुद्रा योजना स्कीम

    गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की इस स्कीम के तहत महिलाएं ब्यूटी पार्लर, टेलरिंग यूनिट, ट्यूशन सेंटर जैसे बिजनेस कर सकती हैं। लोन के पहले कैंडीडेट का वेरिफिकेशन किया जाता है। वेरिफिकेशन के बाद फीमेल एप्लीकेंट को मुद्रा कार्ड मिलता है। इसके जरिए वे बिजनेस की जरूरत का सामान खरीद सकती हैं। इस स्कीम को शिशु, किशोर और तरुण ऐसी तीन कैटेगरी में डिवाइड किया गया है।

    अन्नपूर्णा स्कीम

    यह स्कीम उन महिलाओं के लिए है जो स्मॉल स्केल पर फूड कैटरिंग बिजनेस करना चाहती हैं। इनमें टिफिन सर्विस, पैक्ड स्नैक्स जैसे काम किए जाते हैं। इसमें अधिकतम 50 हजार रुपए तक का लोन मिलता है, जिसे 36 महीनों में रिटर्न करना होता है। इस लोन में एक महीने का EMI फ्री पीरियड भी मिलता है। इंटरेस्ट मार्केट रेट के मुताबिक ही वसूल किया जाता है। यह स्कीम स्टेट बैंक ऑफ मैसूर प्रोवाइड कर रहा है।

    उद्योगनी स्कीम

    यह लोन स्मॉल स्केल बिजनेस, रिटेल बिजनेस और एग्रीकल्चर एक्टिविटीज के लिए दिया जाता है। इस लोन को वही महिलाएं ले सकती हैं जिनकी उम्र 18 से 45 साल के बीच है। इसमें अधिकतम सीमा 1 लाख रुपए की है। यह स्कीम पंजाब और सिंध बैंक प्रोवाइड कर रहा है।

    स्त्री-शक्ति पैकेज

    ऐसी कंपनियां जिनमें 50 परसेंट से ज्यादा शेयर महिला के नाम पर हैं, वे इस स्कीम का फायदा उठा सकते हैं। इसमें लोन अमाउंट 2 लाख रुपए से ज्यादा का होता है तो इंटरेस्ट रेट 0.5 परसेंट लगता है। 5 लाख रुपए तक के लोन पर कोई सिक्युरिटी भी जमा नहीं करना होती। यह एसबीआई की स्कीम है।

    देना शक्ति स्कीम 

    देना बैंक की इस स्कीम में एग्रीकल्चर, स्मॉल एंटरप्राइज, रिटेल ट्रेड, माइक्रो क्रेडिट, एजुकेशनल और हाउसिंग को फोकस किया गया है। मैक्सिमम लिमिट और इंटरेस्ट रेट अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से डिवाइड किया गया है। जैसे एजुकेशन और रिटेल में 20 लाख रुपए तक का लोन दिया जा रहा है। इंटरेस्ट रेट 0.25 परसेंट है।

    महिला उद्यम निधि स्कीम 

    यह स्कीम उन महिला के लिए है, जो स्मॉल-स्केल पर अपनी इंडस्ट्री रन करती हैं। छोटे लेवल पर काम कर रही हैं महिलाएं अपने बिजनेस को अपग्रेड या मॉर्डनाइज करने के लिए भी इस स्कीम का फायदा उठा सकती हैं। पंजाब नेशनल बैंक यह स्कीम प्रोवाइड कर रहा है।

    सेंट कल्याणी स्कीम

    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की इस स्कीम में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस इंडस्ट्री में माइक्रो और स्मॉल-स्केल बिजनेस करने वाली महिलाओं को टारगेट किया गया है। इसमें हैंडीक्राफ्ट मेकर्स, टेलर्स, डॉक्टर्स, ब्यूटी पार्लर्स, गारमेंट मेकिंग, ट्रांसपोर्ट बिजनेस आदि शामिल हैं। यह स्कीम रिटेल ट्रेड, एजुकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के लिए एप्लीकेबल नहीं है।



    ( “मोना-गुरु” हर महिला की वो आभासी (वर्चुअल) सहेली है ,जो रोजमर्रा की हर मुश्किल का आसान हल तो देती ही है साथ ही अपनी सखियों को घर-संसार से जुडी हर बातों में आगे भी बनाये रखती है.)

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    इन्टरनेट की लत

    इन्टरनेट की लत से दूर करे अपने बच्चे को

    सखियों इन्टरनेट की लत आजकल लगभग हर एक घर में समस्या बन चुकी है

    कारण बिलकुल साफ़ है आज कल की लाइफस्टाइल में टेक्नोलॉजी हर उम्र के लोगों के जीवन का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है. इंटरनेट का प्रभाव हर उम्र के लोगों पर देखा जा सकता है. लेकिन इसका सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ रहा है ।

    टेक्नोलॉजी जहां साइंस का दिया हुआ वरदान है, वहीं इसका ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के शारीरिक विकास के साथ उनके दिमाग पर भी काफी बुरा असर डालता है ।

    इंटरनेट की वजह से बच्चे आउटडोर गेम्स से दूर हो गए हैं. जिस कारण वो मोटापे के साथ कई तरह की बीमारियों के शिकार होते जा रहें हैं ।

    अगर आपका बच्चा भी अपना ज्यादातर समय इंटरनेट पर ही गुजारता है, तो आप इन बातों को अपनाकर अपने बच्चे को इंटरनेट का ज्यादा प्रयोग करने से रोक सकते हैं ।

    1. आपका बच्चा इंटरनेट पर क्या देख रहा है. इसकी पूरी जानकारी रखना आपकी जिम्मेदारी है. साथ ही यह ध्यान रखें कि आपका बच्चा किस तरह के वीडियो गेम्स खेलता है, टीवी पर किस तरह की फिल्में या प्रोग्राम देखता है ।
    2. अपने बच्चे से इस बात पर जरूर चर्चा करें कि वीडियो गेम्स, फिल्म और टीवी प्रोग्राम में उन्हें क्या पसंद आया और क्या नहीं, और उससे उन्होंने क्या सीखा ।
    3. अपने बच्चों को ऐसे काम करने पर जोर दें, जो उनके लिए फायदेमंद हों. उन्हें पेड़ पौधे लगाना सिखाएं उनके लाभों के बारे में बताएं ।
    4. जितना हो सके अपने बच्चों को आउटडोर गेम्स में बिजी रखें. उनको खेलों से जुड़ी सभी जानकारी दें और खेल-कूद में उनकी ज्यादा से ज्यादा रुचि पैदा करें ।
    5. अपने बच्चों को ज्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल करने ना दें. उनके इंटरनेट इस्तेमाल करने का एक समय निश्चित करें ।
    6. अपने बच्चों के बेड रुम में कभी भी टीवी, लैपटॉप, या मोबाइल फोन ना रखें ।
    7. अकसर माता-पिता अपने बच्चों के प्यार में इतने खो जाते हैं कि वो उनकी हर डिमांड को बिना सोचें समझे पूरी करने लगते हैं. आपका यह व्यवहार आपके बच्चे पर बहुत गलत असर डालता है, इसलिए ऐसा करने से बचें ।

    उपरोक्त लिखे तरीको को यदि आप प्यार-पूर्वक अपने बच्चों के जीवन में उतारने का प्रयास करेंगी तो आप यकीन जानिये उसकी इन्टरनेट की लत जरुर छूट जायगी, इससे उसके स्वभाव में भी परिवर्तन आएगा और आउटडोर एक्टिविटी बढ़ने से स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा.

    “मोना-गुरु” हर महिला की वो आभासी (वर्चुअल) सहेली है ,जो रोजमर्रा की हर मुश्किल का आसान हल तो देती ही है साथ ही अपनी सखियों को घर-संसार से जुडी हर बातों में आगे भी बनाये रखती है.

    और भी देखिये :

    विशेष महिला बैंक-स्कीम्स जिसमें बिना किसी गारंटी और गिरवी के महिलाओं को लोन मिलेगा