सफल पैरेंटस

सफल पैरेंट्स बनना है तो हमेशा ध्यान रखिये ये आठ छोटी-छोटी सी बातें

सफल पैरेंट्स बनना है तो हमेशा ध्यान रखिये ये छोटी-छोटी सी बातें

हर दंपती के लिए मां-पिता बनना एक बेहद खूबसूरत पल होता है. लेकिन दूसरी तरफ पैरेंट्स बनना इतना आसान काम भी नहीं है. कई मौके आते हैं जब आप खुद को एक पैरेंट्स के तौर पर बुरी तरह असफल महसूस करते हैं. हालांकि हर पैरेंट्स की जिंदगी में ऐसे उतार-चढ़ाव आते रहते हैं.हम आपको बता रहे हैं कि आप कैसे एक अच्छे पैरेंट्स साबित हो सकते हैं, बस कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर.

1- बच्चों पर गर्व करें,कोसे नहीं – मां-बाप बनने के एहसास से खूबसूरत कोई एहसास नहीं होता है. यह हर किसी की जिंदगी में किसी तोहफे से कम नहीं होता है. आप खुद को खुशकिस्मत समझिए और अपने बच्चे को भी ऐसा ही महसूस कराइए. कई लोग कुछ वजहों से मां-बाप नहीं बन पाते हैं और उनकी सबसे बड़ी ख्वाहिश यही रह जाती है कि उनकी भी कोई औलाद हो. इसलिए कभी भी अपने बच्चों पर अफसोस ना करें और ना ही अपने बच्चों के अंदर ऐसी भावनाएं पनपने दें.



2-कभी भी उनकी तुलना ना करें – यह एक जुर्म है कि आप अपने बच्चे की तुलना किसी और से करती हैं. चाहे वे आपके बच्चे के दोस्त हों, भाई-बहन हों या फिर कोई और. आपको यह समझना चाहिए कि हर बच्चा अपने आप में खास होता है. हर बच्चे के अलग सपने और सोच हो सकती है और यह पैरेंट्स का काम है कि वे उनकी भावनाओं और सपनों का सम्मान करें.अगर आप अपने बच्चे को किसी से कमतर बताते हैं तो वह धीरे-धीरे हीनभावना का शिकार हो सकता है और उसका आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप अपने बच्चे को उसी रूप में स्वीकार करें जैसे वो हैं. वे अपनी जिंदगी में जो बनना चाहते हैं, उन्हें बनने दें. उन्हें जिस चीज में दिलचस्पी है, उन्हें करने दें.

3-कभी भी उन्हें कड़ी सजा ना दें – जो बच्चा गलतियां ना करें, शरारत ना करें, वह बच्चा बच्चा नहीं है. इसका यह मतलब नहीं है कि आप उनकी हर गलती पर आंख मूंद लें. बस बात इतनी है कि उन्हें सजा और डांट एक अनुपात में हो. किसी भी परिस्थिति में उन्हें शारीरिक रूप से सजा ना दें. अपना सम्मान खोने के साथ-साथ बच्चों को पीटना उन्हें हिंसक बना देती हैं. आपका बच्चा दूसरों से भी मारपीट करना शुरू कर देगा और उसके अंदर आक्रामकता बढ़ती जाएगी. अपने बच्चों को सबक सिखाने के लिए दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करें लेकिन उन्हें मारें-पीटे नहीं.

4-उन्हें समझाने के लिए स्वाभाविक नतीजे बताएं – आप चाहे कितना भी डांट लें और धमकी दें उन्हें कभी भी अपनी गलती समझ नहीं आएगी. सबसे अच्छा तरीका है कि उन्हें समझाने के लिए व्यावहारिक नतीजे देखने दें. उदाहरण के तौर पर- आपने अपने बच्चे को कमरा साफ रखने की हिदायत देती है तो छोड़ दें. जब उसकी चीजें खोने लगेंगी तो उसे खुद ही यह बात समझ आएगी. इसमें वक्त तो ज्यादा लगेगा लेकिन तरीका कारगर जरूर है.

5- आपके काम आपके शब्दों से ज्यादा बोलते हैं – कई पैरेंट्स ऐसे होते हैं जो अपने बच्चों से बहुत अच्छी-अच्छी बातें करते हैं लेकिन खुद उन पर अमल नहीं करते हैं. यह पैरेंट्स की सबसे बड़ी गलती होती है क्योंकि आपका बच्चा वही कुछ सीखता है जो वह आपको करते हुए देखता है. यकीन मानिए कई बातें वह आपके बिना सिखाए आपको देखकर ही सीख जाता है. अपने बच्चों के सामने अपने बर्ताव में खास सावधानी बरतें.







शिशुओं की समस्याएँ

शिशुओं की समस्याएँ एवं घरेलू निदान

शिशुओं की समस्याएँ एवं उनके घरेलू निदान

बच्चों के लिए घरेलू नुस्खे पता होने से छोटी छोटी परेशानियों का घर पर ही इलाज हो सकता है। जब तक बच्चे हँसते खेलते रहते है ,सभी को बहुत प्यारे लगते है। जब वे रोना शुरू करते है तो परेशानी बढ़ा देते है। उन्हें समझ नहीं आता उन्हें क्या करना चाहिए , वे तकलीफ में तो बस रोना जानते है। बड़ों को उनकी परेशानी का अंदाजा लगाकर उनकी समस्या का हल निकालना पड़ता है। बच्चों को भी वे सब परेशानी हो सकती है जो बड़ों को होती है पर कुछ समस्या ऐसी होती है जो सामान्य होती और अधिकतर बच्चों को होती है। इन परेशानियों में घरेलु निदान  बहुत काम आते है।



बच्चों के पेट में दर्द –

*बच्चों को पेट दर्द कई कारण से हो सकता है। स्तनपान करने वाला शिशु भी इससे अछूता नहीं है। दूध पिलाने वाली माँ को ऐसे भोजन से परहेज करना चाहिए जो पचने में भारी हों और पेट में गैस पैदा कर सकते हों। यदि शिशु को पेट दर्द हो रहा है तो पानी में हींग घोलकर उसके नाभि के आस पास ये पानी लगा दें। इससे गैस निकल जाएगी और शिशु रोना बंद कर देगा।

*चौथाई कप पानी में 15 -20 दाने अजवाइन के डालकर उबाल लें। आधा रह जाने पर थोड़ा सा गुड़ मिला लें थोड़ा गुनगुना रहने पर आधा चम्मच सुबह , आधा चम्मच शाम को पिलायें । पेटदर्द  भी ठीक होता है और सर्दी लगी हो तो वो भी मिटती है। सर्दी के मौसम में नहलाने या सिर धोने के बाद इस पानी को पिलाने से सर्दी जुकाम नहीं होते।

बच्चों की गुदा में चूरने कीड़े –

*बच्चों को गुदा में चूरने कीड़े की समस्या आम है। इसकी वजह से बच्चे रोते रहते है। ऐसे में थोड़ी सी रुई मिट्टी के तेल में भिगो कर बच्चे की गुदा में लगा दें। चूरन कीड़े खाने बंद हो जायेंगे और बच्चा आराम से सो जायेगा।

*थोड़ा सा टेलकम पाउडर ( मिंट वाला या घमौरी वाला नहीं हो ) गुदा पर लगाने से चूरने कीड़े खाने तुरंत बंद हो जाते है।



बच्चों के कान में दर्द –

*बच्चा यदि कान के पास बार बार हाथ ले जाकर रो रहा हो तो हो सकता है उसे कान में दर्द हो रहा हो। कान में हल्की सी बाफी (मुँह से गर्म हवा ) देने से उसे आराम मिलेगा.

*कपडे को गर्म करके कान के पास लाने से सिकाई करने से  कान के दर्द में आराम आता है।

* लेटकर स्तनपान कराने के कारण कान में इन्फेक्शन होने की सम्भावना बढ़ जाती है अतः इसका ध्यान रखना चाहिए। लेट कर शिशु को स्तनपान नहीं कराएँ।

* माँ अपने दूध की दो बूँद कान में टपका दे तो शिशु को कान के दर्द में आराम मिलेगा।

बच्चों के दांत निकलते समय-

* गाय के दूध में मोटी सौंफ उबालकर एक -एक चम्मच तीन चार बार पिलाने से दाँत आसानी से निकलते है।

* मसूड़ों पर दिन में चार पांच बार शहद लगाना चाहिए।



बच्चों को दस्त-

* जायफल को पानी  के साथ घिसें। ये पानी आधा चम्मच सुबह शाम पिलाने से दस्त बंद हो जाते है। इससे सर्दी भी मिटती है।

* दूध पीने से जिन बच्चों को उल्टी और दस्त की परेशानी होती हो उन्हें सेब का रस दिन में तीन बार पिलाना चाहिये। सेब का रस, मरोड़ चलकर होने वाले दस्त में भी बहुत आराम देता है। सेब छिलके हटा कर काम लेनी चाहिए। सेब के टुकड़े करके दूध में उबाल कर इस दूध को पीने से गर्मी में होने वाले दस्त ठीक होते है।

* दूध में संतरे  का रस मिलाकर पिलाने से बच्चों को दस्त में आराम आता है। इस दूध को रखना नहीं चाहिए।

* एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ डालकर उबालें। आधा रह जाये तब छानकर ठंडा होने दें। ये पानी दो-दो चम्मच तीन चार बार पिलाने से दस्त , पेचिश , मरोड़ आदि ठीक हो जाते है।

* पका हुआ केला मसल कर खिलाने से दस्त ठीक होते है। दो साल से अधिक उम्र के बच्चों को दही और चावल खिलाने चाहिए।

विशेष :  दस्त में नमक व चीनी का घोल लगातार पिलाना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी नहीं हो।



बच्चा बिस्तर में पेशाब करता है –

* सोने से पहले बच्चे को पेशाब कर लेने की आदत डालें।

* तिल और गुड़ के लडडू खाने से बच्चों का बिस्तर में पेशाब करना बंद होता है।

* एक गिरी अखरोट और 10 -12 किशमिश रोज सुबह खिलाने से कुछ दिनों में बिस्तर में पेशाब करना बंद हो जाता है।

तो मित्रों ये थी मोना गुरु की और से छोटे बच्चों की कुछ बिलकुल सामान्य समस्याएँ और उनके बिलकुल साधारण से घरेलु इलाज आपको अगर ये जानकारी अच्छी लगी हो तो आप फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर इसे शेयर करके आगे भी अपने मित्रों के साथ साझा कर सकते है, शेयरिंग के लिए आवश्यक लिंक्स नीचे दिए गये है.

“मोना-गुरु” हर महिला की वो आभासी (वर्चुअल) सहेली है ,जो रोजमर्रा की हर मुश्किल का आसान हल तो देती ही है साथ ही अपनी सखियों को घर-संसार से जुड़ी हर बातों में आगे भी बनाये रखती है.

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पीरियड्स से जुड़ी जानकारी

कैसे दें पीरियड्स से जुड़ी जानकारी अपनी बेटी को

बेटी …. पीरियड्स एक सामान्य प्रक्रिया है …. यह कहने में बिलकुल मत संकोच कीजिये, आगे बढिए और अपनी किशोर बेटी से इस विषय पर बात कीजिये , मासिक धर्म या माहवारी (मेन्स्ट्रुअल साइकल) की शुरुआत अब उम्र से पहले होने लगी है. ऐसे में ज़रूरी है कि आप इस विषय में अपनी लाड़ली से खुलकर बात करें. बेटी को कैसे दें पीरियड्स से जुड़ी सही व पूरी जानकारी? आइए, जानते हैं.

कैसे करें बात की पहल?
अगर आप अचानक बेटी को पीरियड्स के बारे में बताने से हिचकिचा रही हैं, तो निम्न तरी़के अपनाकर पहल कर सकती हैं-

  • बेटी को पीरियड्स से जुड़ी जानकारी देने का सबसे अच्छा तरीक़ा है, टीवी पर दिखाए जानेवाले सैनिटरी नैपकिन के विज्ञापन से बात शुरू करना.
  • स्कूलों में भी पीरियड्स से जुड़ी जानकारी देने के लिए ख़ासतौर पर लेक्चर्स रखे जाते हैं. आप चाहें तो इससे भी शुरुआत कर सकती हैं. अगर स्कूल में उसे जानकारी दी गई है, तो आप भी सहज होकर उसे समझा पाएंगी.
  • अपना अनुभव साझा करके भी आप बात की पहल कर सकती हैं. ऐसे में उसे ये भी बताएं कि आपको इस विषय में जानकारी कैसे और किससे मिली, आपने ख़ुद को कैसे तैयार किया आदि.




तैयार रखें सवालों के जवाब
जब आप अपनी बेटी को पीरियड्स से जुड़ी जानकारी देंगी या उसे कहीं बाहर से इस विषय में पता चलेगा, तो ज़ाहिर है, वो आपके आगे सवालों की झड़ी लगा देगी. ऐसे में ख़ुद को उन सवालों के जवाब देने के लिए तैयार रखें, ताकि आप बेटी को पीरियड्स से जुड़ी पूरी और सही जानकारी दे सकें. आमतौर पर बेटी निम्न सवाल कर सकती है:

  • पीरियड्स स़िर्फ महिलाओं को ही क्यों होता है, पुरुषों को क्यों नहीं?
  • क्या पीरियड्स के दौरान दर्द से जूझना पड़ता है?
  • मेन्स्ट्रुअल साइकल कितने दिनों और कितने सालों तक होता है?
  • क्या मैं पीरियड्स के दौरान खेल-कूद सकती हूं?
  • जिन्हें पीरियड्स नहीं होते, उन्हें किस तरह की परेशानियां हो सकती हैं?
  • हो सकता है, इन सवालों के जवाब देना आपके लिए आसान न हो, मगर इस बात का ख़्याल रखें कि आधी जानकारी हमेशा हानिकारक होती है. अतः बेटी को पूरा सच बताएं, ताकि उसके मन में किसी तरह की कोई शंका न रहे.



    बेसिक हाइजीन की जानकारी भी दें
    पीरियड्स से जुड़ी सारी बातें बताने के साथ ही अपनी बेटी को पीरियड्स के दौरान बेसिक हाइजीन की जानकारी भी अवश्य दें, जैसे-

    • सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए?
    • कब और कितने समय के बाद नैपकिन बदलना ज़रूरी है?
    • सैनिटरी नैपकिन के इस्तेमाल के बाद हाथ क्यों धोना चाहिए?
    • इस्तेमाल किए हुए सैनिटरी नैपकिन को कैसे और कहां फेंकना उचित है?
    • इंफेक्शन से बचने के लिए पीरियड्स के दौरान प्राइवेट पार्ट्स की सफ़ाई पर किस तरह ध्यान देना चाहिए?
    • साथ ही पैंटी की साफ़-सफ़ाई पर भी विशेष ध्यान देना क्यों ज़रूरी है?

    विशेष टिप : कैसे पाएं पेट दर्द से राहत?
    पीरियड्स के दौरान पेट दर्द होना आम बात है. ऐसे में दर्द से राहत पाने के लिए 1 कप दही में 1/4 कप भुना हुआ जीरा और 1 टेबलस्पून शक्कर मिलाकर खाने से दर्द से राहत मिलती है.

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