बच्चों की अच्छी पढाई और ज्योतिष शास्त्र के साधारण उपाय

कई बार देखा गया है की कुछ माएं बार-बार ये शिकायत करती रहती है की उनके बच्चे का दिमाग तो बहुत अच्छा है लेकिन वो उसे पढाई में नही लगाता है उसे इधर-उधर बर्बाद करता रहता है, वैसे तो इस बात के अनेक कारण हो सकते है लेकिन हमारा प्राचीन ज्योतिष ज्ञान इस पर अलग प्रकार के विचार रखता है उसका कहना है की हर बालक एक अलग-अलग समय में पैदा हुआ है,सबका प्रारब्ध भी अलग-अलग है और इन्ही सब बातो का प्रभाव मानव के सम्पूर्ण जन्म में बना रहता है, लेकिन हमारा ये प्राचीन शास्त्र सब समस्याओं के बड़े ही साधारण से हल भी बताता है, और इस उपायों को आजमाकर मोना-गुरु वेबसाइट से कई लोगो ने बहुत लाभ भी उठाया है.

तो आज बच्चों की इसी पढाई सम्बंधित समस्या के कुछ बड़े ही साधारण से ज्योतिष हल आज आपको मोना-गुरु बता रही है, इनका प्रयोग कीजिये और खुद अपने बच्चे में फर्क देखिये.

नाम-राशि के अनुसार आराध्य देव

मेष (aries) :  राशि के विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए सूर्य सहायक है। ऐसे जातकों को रोजाना सुबह सूर्य नमस्‍कार करना चाहिए और सूर्य भगवान को अर्ध्‍य देना चाहिए। इन छात्रों का रूटीन जितना नि‍यमित होगा, पढ़ाई में उतने ही अच्‍छे परिणाम हासिल कर पाएंगे।

वृष (turus) : राशि के जातकों को के लिए पढ़ाई का कारक ग्रह बुध है। इन जातकों को नियमित रूप से गणेशजी की आराधना करनी चाहिए। इन जातकों को बार-बार रिवीजन करते रहने की जरूरत है।

पढाई और ज्योतिष

मिथुन (gemini) : राशि के जातकों के लिए शुक्र पढ़ाई का कारक है। ऐसे जातकों को देवी आराधना करना लाभदायी है। पढ़ते समय कमरे का वातावरण अगर खुश्‍बूदार होगा तो ये बेहतर एकाग्र हो पाएंगे।

कर्क (cancer) : राशि के जातकों की पढ़ाई के लिए मंगल कारक ग्रह है। नियमित अध्‍ययन के साथ रोजाना हनुमान मंदिर जाने से परीक्षाओं में अंकों का प्रतिशत तेजी से बढ़ सकता है।

पढाई और ज्योतिष

सिंह (Leo) :  राशि के जातकों के लिए गुरु पढ़ाई का कारक है। नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप करना और विष्‍णु मंदिर जाने से छात्रों को विद्याध्‍ययन में लाभ होगा।

कन्‍या (virgo) ,तुला राशि ( Libra) :  के छात्रों के लिए शनि की आराधना लाभदायक रहती है। रोजाना शनि मंदिर जाना और प्रत्‍येक शनिवार तेल एवं तिल की वस्‍तुएं चढ़ाने से शनिदेव प्रसन्‍न होते हैं।

वृश्चिक राशि (Scorpio) :   के छात्रों के लिए गुरु शिक्षा दिलाने वाला है। सरस्‍वती मंत्र का जाप करने और सरस्‍वती के मंदिर जाना लाभदायक सिद्ध हो सकता है।

पढाई और ज्योतिष

धनु राशि ( Sagittarius) : के लिए मंगल कारक है। इन छात्रों को नियमित रूप से हनुमान मंदिर जाना चाहिए।

मकर राशि (Capricorn) : के छात्र देवी आराधना कर शिक्षा में बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।

कुंभ राशि (Aquarius) :  के जातकों को गणपति की आराधना करने से अध्‍ययन क्षेत्र में सफलता मिलेगी

मीन राशि (Pisces) : के छात्रों के लिए चंद्रमा शिक्षा का कारक है। ये छात्र शिव आराधना कर अच्‍छे परिणाम हासिल कर सकते हैं।

पढाई और ज्योतिष

सरस्‍वती मंत्र

पढ़ाई में लगे विद्यार्थियों को सरस्‍वती मंत्र का जाप करने से पढ़ी सामग्री को तेजी से याद करने और उसे बेहतरीन तरीके से प्रस्‍तुत करने में सहायता मिल सकती है। तंत्र में बीजमंत्र से युक्‍त सरस्‍वती मंत्र को महामंत्र तक कहा गया है।

‘’ऐं वद् वद् वाग्‍वादिनी स्‍वाहा’’

विद्यार्थी रोजाना सुबह नहा धोकर, साफ सुथरे आसन पर बैठकर एक माला का जाप नियमित रूप से करे तो कुछ ही महीनों में इसका शानदार परिणाम दिखाई देने लगता है।

अगर जाप करने से पूर्व ग्‍यारह बार अनुलोम विलोम प्राणायाम किया जाए तो विद्यार्थी की इडा और पिंगला दोनों नाडि़यां चलने लगती है और मंत्र अधिक तेजी से सिद्ध होता है। किसी भी विद्यार्थी के लिए सुबह पंद्रह मिनट की यह प्रक्रिया अपनाना मुश्किल नहीं है। इससे शिक्षा संबंधी शानदार परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

चंद्र है महत्‍वपूर्ण (significance of moon)

कुछ विद्यार्थी अलसुबह जल्‍दी उठकर पढ़ते हैं, तो कुछ देर रात तक जागकर पढ़ते हैं। हर विद्यार्थी की अपनी जैविक घड़ी होती है, जिसके अनुसार वह अपने पढ़ने का समय निर्धारित कर लेता है।

इसके बावजूद देखा यह गया है कि सुबह तड़के उठकर पढ़ने वाले विद्यार्थी परीक्षाओं में बेहतर परिणाम हासिल करते हैं।

परीक्षाओं के दिनों में भले ही यह क्रम न बना रहे, लेकिन पूरे साल की जाने वाली पढ़ाई में रात की तुलना में सुबह का समय बेहतर बताया गया है। इसका प्रमुख कारण यह है कि दिन के समय चंद्रमा सक्रिय होता है तो रात के समय शुक्र।

चंद्रमा के काल में की गई पढ़ाई न केवल सात्विक और शुद्ध होती है, बल्कि लंबे समय तक काम आने वाली होती है, वहीं शुक्र के प्रभाव में किया गया अध्‍ययन दीर्ध अवधि तक काम नहीं आ पाता है।

तो सखियों ये थे अपने प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के कुछ बिलकुल ही साधारण से उपाय, प्रयोग कीजिये अपने बच्चे में फर्क आपको साफ़-साफ़ नजर आएगा

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